
A Day in the Life of a Laundry Franchise Owner
Most people ask what a laundry store costs before asking what running one feels like. Here is an honest walk through a working day at a Dhulai store, hour by hour...
कपड़े धुलना और प्रेस कराना हर घर की रोज़ की ज़रूरत है। गुरुग्राम जैसे शहरों में, जहां घर के दोनों लोग नौकरी करते हैं और समय सबसे कम पड़ता है, यही रोज़मर्रा की ज़रूरत एक बड़े बाज़ार में बदल चुकी है। इसीलिए बहुत लोग जानना चाहते हैं कि लॉन्ड्री बिजनेस कैसे शुरू करें, इसमें क्या-क्या तैयारी लगती है और किन बातों में शुरुआती लोग सबसे ज़्यादा गलती करते हैं। इस लेख में सोच से लेकर स्टोर खुलने तक का पूरा रास्ता आसान भाषा में समझाया गया है।
इस काम में उतरने के दो तरीके हैं, और दोनों में मेहनत बराबर लगती है, बस जोखिम की जगह बदल जाती है।
दोनों में से कोई भी रास्ता "आसान" नहीं है। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि अपने ब्रांड में आप सीखते-सीखते आगे बढ़ते हैं, और फ्रेंचाइजी में किसी के सीखे हुए तरीके से शुरुआत करते हैं।
किराये के फ्लैट में रहने वाले नौकरीपेशा लोग, परिवार वाले घर, या होटल, सैलून, जिम और ऑफिस जैसे बिज़नेस ग्राहक, तीनों की ज़रूरत अलग है। जिस इलाके में स्टोर खोलना है, वहां किस तरह के लोग ज़्यादा रहते हैं, यह पहले देख लें। इससे मशीनों का साइज़ और सर्विस की लिस्ट दोनों तय करना आसान हो जाता है।
सिर्फ़ धुलाई और प्रेस से शुरुआत हो सकती है, लेकिन असली फ़ायदा तब होता है जब एक ही स्टोर से ग्राहक की पूरी ज़रूरत पूरी हो। वॉश एंड फोल्ड, प्रीमियम लॉन्ड्री, ड्राई क्लीनिंग के साथ पर्दे, सोफा, कारपेट और गद्दों की सफ़ाई जुड़ जाए तो एक ही घर से साल भर काम मिलता रहता है।
लॉन्ड्री का काम सुविधा का काम है। ग्राहक वही दुकान चुनता है जो उसके रास्ते में पड़ती है। सेक्टर मार्केट, सोसाइटी के गेट के पास की दुकान, या दफ़्तरों के बीच की जगह, ऐसी लोकेशन सबसे काम आती हैं।
दुकान किराये का एग्रीमेंट, GST रजिस्ट्रेशन, स्थानीय नगर निगम का ट्रेड लाइसेंस, बिजली का कमर्शियल कनेक्शन और फायर सेफ़्टी का इंतज़ाम, ये सब काम शुरू होने से पहले कर लेना चाहिए।
सुझाव: जगह फाइनल करने से पहले वहां पानी की सप्लाई, पानी निकलने का रास्ता और बिजली का लोड ज़रूर जांच लें। मशीनें बाद में बदली जा सकती हैं, जगह की ये कमियां नहीं।
घर की वॉशिंग मशीन और कमर्शियल मशीन में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ है। कमर्शियल मशीनें दिन भर लगातार चलने के लिए बनी होती हैं और कपड़े पर हाथ भी हल्का रखती हैं। एक पूरे स्टोर में आम तौर पर ये चीज़ें लगती हैं:
| हिस्सा | किस काम के लिए |
|---|---|
| कमर्शियल वॉशर-ड्रायर | रोज़ की धुलाई और सुखाना, अलग-अलग साइज़ के लोड के लिए |
| स्टीम बॉयलर और इस्त्री टेबल | फिनिशिंग, जिससे कपड़ा ग्राहक को नया जैसा लगे |
| स्टेबलाइज़र | बिजली ऊपर-नीचे होने पर मशीनों की सुरक्षा |
| POS, बिलिंग और टैग प्रिंटर | हर कपड़े की पहचान, बिल और ग्राहक का रिकॉर्ड |
| काउंटर, रैक और हैंगिंग | आए और तैयार कपड़ों को अलग रखना |
इनके अलावा CCTV, AC, फायर सेफ़्टी, पैकेजिंग और कपड़े के हिसाब से अलग-अलग केमिकल भी ज़रूरी हैं। एक चीज़ जो शुरुआती लोग सबसे ज़्यादा हल्के में लेते हैं, वह है फिनिशिंग। ग्राहक सफ़ाई से ज़्यादा इस बात पर लौटता है कि कपड़ा हाथ में आते ही कैसा दिखता है।
एक लॉन्ड्री स्टोर का पूरा भरोसा एक ही बात पर टिका होता है: जो कपड़ा अंदर आया, वह सही हालत में उसी ग्राहक के पास वापस जाए। इसके लिए तीन तरह का काम रोज़ चलता रहता है, काउंटर पर कपड़ा लेना और जांचना, पीछे धुलाई और फिनिशिंग, और पिकअप-डिलीवरी।
हर कपड़े को लेते समय जांचना और टैग लगाना सबसे ज़रूरी आदत है। किस कपड़े पर कौन सा दाग है, कहां सिलाई खुली है, कौन सा बटन ढीला है, यह सब शुरू में ही दर्ज हो जाए तो बाद की ज़्यादातर शिकायतें ही नहीं बनतीं। Dhulai के स्टोर्स में हर कपड़े को साफ़ करने से पहले जांचा जाता है और कपड़े और दाग के हिसाब से तरीका चुना जाता है।
स्टाफ कम ही चाहिए, लेकिन सही चाहिए। जिस व्यक्ति के हाथ में प्रेस और फिनिशिंग है, वही आपकी दुकान की पहचान बनाता है।
अगर आप तैयार ढांचे के साथ शुरुआत करना चाहते हैं, तो Dhulai का FOFO Fully Loaded मॉडल कुल ₹12,97,000 + GST के निवेश पर मिलता है। इसमें 10 किलो और 15 किलो की LG कमर्शियल वॉशर-ड्रायर, डुअल सर्वो स्टेबलाइज़र, स्टीम बॉयलर के साथ इस्त्री टेबल, इंटीरियर और ब्रांडिंग, POS, बिलिंग और टैग प्रिंटर, CCTV, AC, फायर सेफ़्टी, पैकेजिंग और केमिकल, और ₹2 लाख की लॉन्च मार्केटिंग (₹1 लाख ऑनलाइन और ₹1 लाख ऑफलाइन) शामिल है।
सपोर्ट में 4 दिन की शुरुआती ट्रेनिंग, काम करने के तय तरीके (SOP), स्टोर सेटअप का को-ऑर्डिनेशन, सॉफ्टवेयर और CRM का एक्सेस, स्टाफ रखने में मार्गदर्शन, सेंट्रल डिजिटल मार्केटिंग, तय इलाके की एक्सक्लूसिविटी और ज़रूरत पड़ने पर सेंट्रल प्रोसेसिंग बैकअप मिलता है। फ्रेंचाइजी फ़ीस नॉन-रिफंडेबल होती है, जो इस इंडस्ट्री में आम चलन है।
आज Dhulai के 5 स्टोर चल रहे हैं, जिनमें 3 फ्रेंचाइजी पार्टनर चलाते हैं और 2 कंपनी के अपने हैं। ब्रांड ISO 9001:2015 सर्टिफाइड है और इलाके शहर-दर-शहर आवंटित किए जाते हैं। चल रहे स्टोर्स की लिस्ट आप हमारे स्टोर लोकेशन पेज पर देख सकते हैं और मॉडल की पूरी जानकारी फ्रेंचाइजी पेज पर दी गई है।
फ्रेंचाइजी मॉडल में जुड़ने के बाद स्टोर खुलने तक आम तौर पर 45 से 60 दिन लगते हैं। इस समय में इलाका और जगह तय होती है, इंटीरियर और ब्रांडिंग का काम होता है, मशीनें लगती और टेस्ट होती हैं, सॉफ्टवेयर सेट होता है, स्टाफ की 4 दिन की ट्रेनिंग पूरी होती है और लॉन्च मार्केटिंग शुरू की जाती है। अपने दम पर यही सब करने में आम तौर पर ज़्यादा समय लगता है, क्योंकि हर चीज़ पहली बार खोजनी पड़ती है।
अगर आप इस काम को और गहराई से समझना चाहते हैं, तो हमारे अंग्रेज़ी लेख भी पढ़ें: How to Start a Laundry Business in India और Laundry Franchise Cost in India।
लॉन्ड्री एक ऐसा काम है जिसमें ग्राहक हर हफ़्ते लौटकर आता है। इसीलिए यहां तेज़ी से बढ़ने की जगह भरोसा बनाने से काम चलता है। जो स्टोर कपड़ा समय पर, साफ़ और ठीक हालत में लौटाता है, उसका ग्राहक खुद उसकी मार्केटिंग करता है।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन-कौन सी सर्विस देना चाहते हैं। एक छोटी दुकान में भी काम शुरू हो सकता है, बस मशीनों, स्टीम इस्त्री टेबल, तैयार कपड़ों की हैंगिंग और ग्राहक के काउंटर के लिए अलग-अलग जगह बनानी पड़ती है। जगह देखने से पहले बिजली का कनेक्शन, पानी की सप्लाई और पानी निकलने का रास्ता ज़रूर जांच लें।
ज़रूरी नहीं है। आप अपना ब्रांड भी बना सकते हैं। फ्रेंचाइजी का फ़ायदा यह होता है कि मशीनों का चुनाव, स्टोर का सेटअप, ट्रेनिंग, सॉफ्टवेयर और मार्केटिंग का ढांचा पहले से तैयार मिलता है, इसलिए शुरुआती गलतियां कम होती हैं।
ऑनबोर्डिंग से लेकर स्टोर लॉन्च तक आम तौर पर 45 से 60 दिन लगते हैं। इस दौरान जगह तय करना, इंटीरियर और ब्रांडिंग, मशीनों की इंस्टॉलेशन और 4 दिन की ट्रेनिंग पूरी होती है।
वॉश एंड फोल्ड, प्रीमियम लॉन्ड्री, ड्राई क्लीनिंग, स्टीम प्रेसिंग के साथ-साथ पर्दे, सोफा, कारपेट और गद्दों की सफ़ाई भी एक ही स्टोर से दी जा सकती है। घर और ऑफिस दोनों तरह के ग्राहक इसी वजह से एक जगह जुड़े रहते हैं।